प्रत्यक्ष कर सुधार और व्यापारिक पारदर्शिता
WitWaves Journal of Multidisciplinary Research, Volume 2, Issue 5, 2025, 25e9afff-acb6-4b83-94da-2058606982e5
Published: 01 January 2025
Abstract
प्रत्यक्ष कर (Direct Tax) किसी भी आधुनिक अर्थव्यवस्था की राजकोषीय व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। प्रत्यक्ष करों के माध्यम से सरकार आय, लाभ और संपत्ति पर कर लगाकर राजस्व एकत्रित करती है तथा उसे आर्थिक विकास, सामाजिक कल्याण, आधारभूत संरचना और सार्वजनिक सेवाओं पर व्यय करती है। भारत में प्रत्यक्ष कर प्रणाली का प्रमुख आधार आयकर अधिनियम, 1961 है, जिसके अंतर्गत व्यक्तिगत आयकर, कॉर्पोरेट कर, पूंजीगत लाभ कर तथा अन्य प्रत्यक्ष करों का निर्धारण किया जाता है। समय के साथ बदलते आर्थिक परिवेश, वैश्वीकरण, डिजिटलीकरण और निवेश-अनुकूल वातावरण की आवश्यकता को देखते हुए भारत सरकार ने प्रत्यक्ष कर प्रणाली में अनेक सुधार लागू किए हैं। प्रत्यक्ष कर सुधारों का प्रमुख उद्देश्य कर प्रणाली को सरल, पारदर्शी, न्यायसंगत और उत्तरदायी बनाना है। हाल के वर्षों में फेसलेस असेसमेंट, ई-फाइलिंग, डिजिटल कर प्रशासन, करदाताओं का चार्टर, कॉर्पोरेट कर दरों में कमी, कर विवाद समाधान योजनाएँ तथा सूचना प्रौद्योगिकी आधारित अनुपालन तंत्र जैसे सुधारों ने कर प्रशासन को अधिक पारदर्शी और उत्तरदायी बनाया है। इन सुधारों से कर चोरी, भ्रष्टाचार और अनावश्यक मानवीय हस्तक्षेप में कमी आई है तथा करदाताओं का विश्वास बढ़ा है। व्यापारिक पारदर्शिता आधुनिक कॉर्पोरेट प्रशासन का एक प्रमुख तत्व है। पारदर्शी कर प्रणाली व्यवसायों को निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा, बेहतर निवेश वातावरण, विदेशी निवेश आकर्षण तथा सुशासन के लिए प्रोत्साहित करती है। दूसरी ओर जटिल कर कानून, अनुपालन लागत, कर विवाद तथा बार-बार होने वाले संशोधन व्यापारिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकते हैं। यह शोध पत्र भारत में प्रत्यक्ष कर सुधारों की पृष्ठभूमि, प्रमुख सुधारों, व्यापारिक पारदर्शिता पर उनके प्रभाव, कॉर्पोरेट प्रशासन, कर अनुपालन, डिजिटल कर प्रशासन, चुनौतियों तथा भविष्य की संभावनाओं का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है। अध्ययन का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि प्रभावी प्रत्यक्ष कर सुधार न केवल सरकारी राजस्व में वृद्धि करते हैं, बल्कि व्यवसायों में विश्वास, पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और दीर्घकालिक आर्थिक विकास को भी सुदृद्ध बनाते हैं।
