भारतीय इतिहास निर्माण और पुराण
WitWaves Journal of Multidisciplinary Research, Volume 2, Issue 5, 2025, 30f4f1dd-1b86-424b-9b0f-ecd1b89f98e7
Published: 30 April 2025
Abstract
पुराणों का अध्ययन करने के पहले उसके अर्थ को समझना चाहिए। पुराण शब्द का अर्थ है 'प्राचीन' अर्थात ऐसे कथानक जो अतीत के गहरे सत्य को रेखांकित करते हैं। जिसमें प्राचीन राजाओं एवं उनके कृत्यों का स्वच्छंद रूप से वर्णन किया गया है। पुराणों के रचयिता लोमहर्ष और उग्रश्रवा को माना जाता है। कुछ पारंपरिक मान्यता के अनुसार महर्षि वेद व्यास को भी इनके संकलन कर्ता के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। मुख्य रूप से 18 पुराणों एवं 29 उपपुराणों का उल्लेख प्राप्त होता है। पार्जिटर नामक एक विद्वान ने आधुनिक काल में पुराणों की तरफ लोगों का ध्यान आकर्षित किया उन्होंने अपनी पुस्तक 'एन्शिएन्ट इंडियन हिस्टोरिकल ट्रेडीशंस एवं डायनेस्टीज ऑफ कलिएज' में इसका उल्लेख किया है। जिस पर रोमिला थापर ने अपने विचार प्रस्तुत कर उसकी उपयोगिता को रेखांकित करने का प्रयास किया है।
