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ई-कॉमर्स व्यवसाय में बौद्धिक संपदा अधिकारों की प्रासंगिकता

सुदर्शन बबेले

सहायक प्राध्यापक

WitWaves Journal of Multidisciplinary Research, Volume 2, Issue 5, 2025, 32672625-b576-4242-8fb5-bf9c8f797df1

Published: 01 January 2025

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Abstract

डिजिटल अर्थव्यवस्था, इंटरनेट और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के तीव विकास ने वैश्विक व्यापार के स्वरूप में व्यापक परिवर्तन किया है। आज ई-कॉमर्स (E-Commerce) केवल वस्तुओं एवं सेवाओं की ऑनलाइन खरीद-बिक्री का माध्यम नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार, डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन विपणन, क्लाउड कंप्यूटिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence), ब्लॉकचेन तथा डेटा-आधारित व्यावसायिक मॉडलों का एक विस्तृत पारिस्थितिकी तंत्र बन चुका है। भारत में Digital India, Startup India, Make in India, ONDC (Open Network for Digital Commerce) तथा डिजिटल भुगतान प्रणालियों के विस्तार ने ई-कॉमर्स क्षेत्र को नई गति प्रदान की है। इस तीव विकास के साथ-साथ बौद्धिक संपदा अधिकारों (Intellectual Property Rights-IPR) की प्रासंगिकता अत्यधिक बढ़ गई है। ई-कॉमर्स व्यवसाय का आधार नवाचार (Innovation), ब्रांड पहचान (Brand Identity), सॉफ्टवेयर, वेबसाइट डिज़ाइन, मोबाइल एप्लीकेशन, डेटाबेस, डिजिटल कंटेंट, लोगो, ट्रेडमार्क, पेटेंट, कॉपीराइट तथा व्यापारिक गोपनीयता (Trade Secrets) पर आधारित होता है। यदि इन बौद्धिक संपदाओं का प्रभावी संरक्षण न हो, तो नकली उत्पादों (Counterfeit Goods), ऑनलाइन ब्रांड उल्लंघन, सॉफ्टवेयर पायरेसी, डोमेन नाम विवाद, डेटा चोरी तथा अनुचित प्रतिस्पर्धा जैसी समस्याएँ व्यवसाय की प्रतिष्ठा और आर्थिक हितों को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती हैं। भारत में पेटेंट अधिनियम, 1970, कॉपीराइट अधिनियम, 1957, ट्रेडमार्क अधिनियम, 1999, डिज़ाइन अधिनियम, 2000 तथा भौगोलिक संकेतक (GI) अधिनियम, 1999 ई-कॉमर्स व्यवसायों की बौद्धिक संपदा की सुरक्षा का प्रमुख कानूनी आधार प्रदान करते हैं। इसके अतिरिक्त भारत विश्व व्यापार संगठन (WTO) के TRIPS Agreement, विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO), Paris Convention, Berne Convention तथा Madrid Protocol का सदस्य होने के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बौद्धिक संपदा संरक्षण के प्रति प्रतिबद्ध है। यह शोध पत्र ई-कॉमर्स व्यवसाय में बौद्धिक संपदा अधिकारों की अवधारणा, प्रकार, कानूनी ढाँचा, व्यावसायिक महत्व, प्रमुख चुनौतियाँ, न्यायिक दृष्टिकोण, डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर IPR प्रवर्तन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) एवं उभरती तकनीकों के प्रभाव तथा भविष्य की संभावनाओं का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है। अध्ययन का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि प्रभावी IPR संरक्षण ई-कॉमर्स व्यवसायों में नवाचार, निवेश, उपभोक्ता विश्वास, निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा तथा सतत आर्थिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।

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