"भारतीय संसद में युवाओं का प्रतिनिधित्व: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन"
WitWaves Journal of Multidisciplinary Research, Volume 3, Issue 3, 2026, 881fb40a-be43-4189-a537-84b424f1d9b5
https://doi.org/10.64175/wjmr.vol.3.issue3.2
Published: 10 July 2026
Abstract
प्रस्तुत शोध अध्ययन "भारतीय संसद में युवाओं का प्रतिनिधित्व : एक विश्लेषणात्मक अध्ययन" विषय पर आधारित है। भारत विश्व के सबसे युवा देशों में से एक है, जहाँ युवा वर्ग सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक विकास का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में संसद सर्वोच्च विधायी संस्था है, अतः उसमें युवाओं का पर्याप्त प्रतिनिधित्व लोकतांत्रिक समावेशन एवं उत्तरदायी शासन के लिए आवश्यक माना जाता है। इसी संदर्भ में प्रस्तुत अध्ययन में भारतीय संसद में युवाओं के प्रतिनिधित्व की स्थिति, प्रवृत्तियों, चुनौतियों एवं संभावनाओं का विश्लेषण किया गया। अध्ययन के प्रमुख उद्देश्यों में भारतीय संसद में युवाओं के प्रतिनिधित्व की स्थिति का अध्ययन करना, विभिन्न लोकसभाओं में युवा प्रतिनिधित्व की प्रवृत्तियों का विश्लेषण करना तथा युवा प्रतिनिधित्व से संबंधित चुनौतियों एवं संभावनाओं का मूल्यांकन करना शामिल था। अध्ययन में शोध प्रश्नों के माध्यम से विषय का विश्लेषण किया गया। शोध की प्रकृति वर्णनात्मक एवं विश्लेषणात्मक रही। अध्ययन पूर्णतः द्वितीयक स्रोतों पर आधारित है। तथ्य लोकसभा सचिवालय, निर्वाचन आयोग, संसदीय रिपोर्टों, इंटर-पार्लियामेंट्री यूनियन (IPU) की रिपोर्टों, पुस्तकों, शोध पत्रों एवं अन्य प्रकाशित स्रोतों से संकलित किए गए। संकलित तथ्यों का वर्गीकरण, सारणीकरण एवं तुलनात्मक विश्लेषण किया गया। अध्ययन के निष्कर्षों से ज्ञात हुआ कि भारत की विशाल युवा जनसंख्या की तुलना में संसद में युवाओं का प्रतिनिधित्व अपेक्षाकृत कम है। प्रथम लोकसभा की तुलना में वर्तमान लोकसभा में युवा सांसदों का अनुपात कम पाया गया। अध्ययन में यह भी स्पष्ट हुआ कि राजनीतिक दलों की उम्मीदवार चयन प्रक्रिया, चुनावी व्यय, राजनीतिक अनुभव की अपेक्षा तथा संरचनात्मक बाधाएँ युवा प्रतिनिधित्व को प्रभावित करती हैं। इसके बावजूद शिक्षा, राजनीतिक जागरूकता, डिजिटल संचार एवं युवा मतदाताओं की बढ़ती संख्या भविष्य में युवा प्रतिनिधित्व के विस्तार की संभावनाएँ प्रस्तुत करती हैं। अध्ययन के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया कि भारतीय लोकतंत्र को अधिक समावेशी एवं प्रतिनिधिक बनाने के लिए संसद में युवाओं की भागीदारी को बढ़ावा देना आवश्यक है। युवाओं का प्रभावी प्रतिनिधित्व लोकतांत्रिक संस्थाओं को अधिक उत्तरदायी, गतिशील एवं भविष्य उन्मुख बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
