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भारतीय लोकतंत्र में सुशासन, उत्तरदायित्व एवं पारदर्शिता : समकालीन परिप्रेक्ष्य में एक अध्ययन

मनोहर पंथी

सहायक प्राध्यापक

WitWaves Journal of Multidisciplinary Research, Volume 1, Issue 3, 2024, aea63f8c-3fe6-46a7-bcd6-61582a6515e9

Published: 05 December 2024

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Abstract

राजनीति शास्त्र सामाजिक विज्ञान की एक महत्वपूर्ण शाखा है, जो राज्य सरकार, संविधान, राजनीतिक संस्थाओं, सार्वजनिक नीतियों, नागरिक अधिकारों तथा शासन प्रणाली का वैज्ञानिक अध्ययन करती है। वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में लोकतंत्र केवल चुनावों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सुशासन, पारदर्शिता, उत्तरदायित्व, विधि का शासन, जनसहभागिता तथा मानवाधिकारों के संरक्षण जैसे तत्य लोकतांत्रिक शासन के प्रमुख आधार बन गए हैं। भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक राष्ट्र है, जहाँ संविधान ने समानता, स्वतंत्रता, न्याय और बंधुत्व के आदशों पर आधारित शासन व्यवस्था स्थापित की है। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात भारत ने लोकतांत्रिक संस्थाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए अनेक संवैधानिक एवं प्रशासनिक सुधार किए हैं। पंचायती राज संस्थाओं का सशक्तीकरण, सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005, ई-गवर्नेस, डिजिटल इंडिया, लोक सेवा वितरण में तकनीक का उपयोग, सामाजिक अंकेक्षण, नागरिक चार्टर तथा लोकपाल एवं लोकायुक्त जैसी व्यवस्थाओं ने शासन में पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्व को बढ़ावा दिया है। इसके बावजूद भष्टाचार, प्रशासनिक विलंब, राजनीतिक अपराधीकरण, धनबल एवं बाहुबल का प्रभाव, चुनावी सुधारों की आवश्यकता, सामाजिक असमानता तथा डिजिटल विभाजन जैसी चुनौतियाँ आज भी लोकतांत्रिक शासन के समक्ष विद्यमान हैं। यह शोध पत्र भारतीय लोकतंत्र में सुशासन, उत्तरदायित्व एवं पारदर्शिता की अवधारणा, संवैधानिक आधार, प्रमुख आयामों, प्रशासनिक सुधारों, सूचना के अधिकार, ई-गवर्नेस, नागरिक सहभागिता, प्रमुख चुनौतियों तथा भविष्य की संभावनाओं का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है। अध्ययन का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि लोकतंत्र की सफलता केवल चुनाव कराने से नहीं, बल्कि प्रभावी, पारदर्शी, सहभागी एवं उत्तरदायी शासन व्यवस्था की स्थापना से सुनिश्चित होती है।

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