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कराधान प्रणाली और उसका व्यवसाय पर प्रभावः भारतीय परिप्रेक्ष्य

अतुल कुमार पांडेय

शोधार्थी

WitWaves Journal of Multidisciplinary Research, Volume 1, Issue 3, 2024, d19cd48c-3dba-4362-aa79-200986ec41ff

Published: 25 December 2024

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Abstract

किसी भी राष्ट्र की आर्थिक व्यवस्था में कराधान प्रणाली (Taxation System) का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान होता है। कर सरकार के राजस्व का प्रमुख स्रोत है, जिसके माध्यम से आधारभूत संरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा, रक्षा, कृषि, उद्योग तथा सार्वजनिक कल्याण से संबंधित योजनाओं का वित्तपोषण किया जाता है। भारत जैसे विकासशील देश में कराधान केवल राजस्व संग्रह का साधन नहीं, बल्कि आर्थिक विकास, आय के पुनर्वितरण, निवेश प्रोत्साहन, रोजगार सृजन तथा सामाजिक न्याय की स्थापना का भी एक प्रभावी माध्यम है। इसलिए कराधान प्रणाली का व्यवसायों की लागत, लाभप्रदता, निवेश निर्णय, उत्पादन, प्रतिस्पर्धात्मकता तथा दीर्घकालिक विकास पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है। भारत में प्रत्यक्ष कर (Direct Tax) तथा अप्रत्यक्ष कर (Indirect Tax) दोनों प्रकार की कर व्यवस्था लागू है। आयकर, कॉर्पोरेट कर, पूंजीगत लाभ कर, सीमा शुल्क तथा वस्तु एवं सेवा कर (GST) भारतीय कर प्रणाली के प्रमुख घटक हैं। वर्ष 2017 में लागू GST ने अनेक अप्रत्यक्ष करों को एकीकृत कर 'एक राष्ट्र-एक कर एक बाजार की अवधारणा को साकार किया, जिससे व्यापारिक प्रक्रियाओं में सरलता, कर पारदर्शिता तथा लॉजिस्टिक लागत में कमी आई। वहीं दूसरी ओर अनुपालन (Compliance), रिटर्न दाखिल करने, ई-इनवॉइस, ई-वे बिल तथा डिजिटल कर प्रशासन जैसी व्यवस्थाओं ने व्यवसायों, विशेषकर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs), के समक्ष नई चुनौतियाँ भी प्रस्तुत की। यह शोध पत्र भारतीय कराधान प्रणाली की संरचना, उद्देश्य, कानूनी आधार, व्यवसाय पर इसके सकारात्मक एवं नकारात्मक प्रभाव, GST सुधारों, प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष करों की भूमिका, कर प्रशासन, कर अनुपालन, डिजिटल कर व्यवस्था तथा भविष्य की चुनौतियों एवं सुधारों का व्यापक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। अध्ययन का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि एक संतुलित, सरल, पारदर्शी और निवेश-अनुकूल कर प्रणाली भारतीय व्यवसायों की प्रतिस्पधोत्मक क्षमता को बढ़ाने के साथ-साथ राष्ट्रीय आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देती है।

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